
Miscarriage meaning in hindi – गर्भपात एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भावस्था स्वतः समाप्त हो जाती है, या भ्रूण का विकास गर्भावस्था के 20 सप्ताह से पहले ही रुक जाता है। हिन्दी में इसे ‘गर्भपात’ कहते हैं।
यह एक दुखद घटना है, जिसके शारीरिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव हो सकते हैं।
इस लेख में हम गर्भपात के कारण, प्रकार, लक्षण, रोकथाम के उपाय और इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से समझेंगे।
Table of Contents
गर्भपात क्या होता है? (What is miscarriage?)

गर्भपात एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें गर्भवती महिला का गर्भ भ्रूण के पूर्ण रूप से विकसित होने से पहले ही समाप्त हो जाता है। यह एक आम समस्या है और अधिकांश गर्भपात पहली तिमाही (12 सप्ताह तक) में होते हैं। कई बार तो महिलाओं को इसका कारण भी पता नहीं होता।
जब दम्पति बच्चे के जन्म के लिए प्रतीक्षा करते हैं, तो कुछ शारीरिक समस्याओं के कारण अचानक गर्भपात हो सकता है। इससे महिला पर शारीरिक और मानसिक रूप से असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में सदमे से उबरने के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता लेना बहुत महत्वपूर्ण है।
वास्तव में मिसकैरेज क्या है? (Miscarriage meaning in hindi)
गर्भपात का हिन्दी में अर्थ है “गर्भपात”। यह गर्भावस्था के 20वें सप्ताह से पहले भ्रूण की मृत्यु को संदर्भित करता है, जो आमतौर पर पहले तीन से चार महीनों के भीतर होती है।
गर्भपात की घटना महिला की गर्भावस्था के चरण पर निर्भर करती है, तथा गर्भपात के विभिन्न प्रकार होते हैं, तथा प्रत्येक के अपने लक्षण होते हैं।
गर्भपात के प्रकार (Types of miscarriage meaning in hindi)

गर्भपात कई प्रकार के होते हैं, जो स्थिति के आधार पर अलग-अलग होते हैं:
1. मिस्ड मिसकैरेज: (Missed miscarriage meaning in hindi)
गर्भपात के दौरान भ्रूण की मृत्यु हो जाती है, लेकिन शरीर उसे स्वयं बाहर नहीं निकाल सकता। एक महिला को गर्भावस्था के लक्षण जैसे मतली या स्तन कोमलता का अनुभव हो सकता है, लेकिन गर्भपात के सामान्य लक्षण जैसे रक्तस्राव का अनुभव नहीं हो सकता।
इसका पता आमतौर पर नियमित अल्ट्रासाउंड के दौरान चलता है, जब यह देखा जाता है कि भ्रूण का विकास रुक गया है। इस स्थिति में, डॉक्टर दवा या डी एंड सी प्रक्रिया के माध्यम से भ्रूण को हटाने की सलाह देते हैं।
यह भावनात्मक रूप से बहुत कठिन हो सकता है, क्योंकि महिला को अचानक गर्भपात की खबर मिलती है।
2. अधूरा गर्भपात: (Incomplete miscarriage meaning in hindi)
गर्भपात के बाद कभी-कभी भ्रूण के कुछ हिस्से गर्भाशय में रह जाते हैं। इससे महिलाओं को पेट में तेज दर्द, अत्यधिक रक्तस्राव और कमजोरी का अनुभव हो सकता है। डॉक्टर आमतौर पर दवा या डी एंड सी (डाइलेशन और क्यूरेटेज) नामक प्रक्रिया से गर्भाशय को साफ करते हैं। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। यह प्रक्रिया महिलाओं के लिए शारीरिक और भावनात्मक दोनों रूप से बहुत कठिन हो सकती है।
यह बहुत महत्वपूर्ण है कि महिलाएं इस स्थिति का यथाशीघ्र उपचार लें।
3. अनिवार्य गर्भपात: (Inevitable Miscarriage meaning in hindi)
ऐसा तब होता है जब गर्भाशय से बहुत अधिक रक्तस्राव होने लगता है और उसे रोका नहीं जा सकता। इस स्थिति में गर्भाशय ग्रीवा खुल जाती है और भ्रूण बाहर आ जाता है। गर्भ में भ्रूण का विकास रुक जाता है और महिलाओं को पेट या पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द हो सकता है। इस स्थिति में चिकित्सा सहायता बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि गर्भाशय को पूरी तरह से साफ किया जाना चाहिए। आमतौर पर, यह पहली तिमाही (12 सप्ताह से पहले) में होता है।
यह बहुत महत्वपूर्ण है कि महिलाएं इस स्थिति के लिए शीघ्र उपचार लें ताकि वे ठीक हो सकें।
4. पूर्ण गर्भपात (Complete Miscarriage meaning in hindi)
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें भ्रूण और गर्भाशय के ऊतकों को गर्भाशय से बाहर निकाल दिया जाता है। इस समय शरीर सब कुछ स्वाभाविक रूप से बाहर निकाल देता है, इसलिए किसी विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं होती। महिलाओं को कुछ दिनों तक हल्का रक्तस्राव और ऐंठन का अनुभव हो सकता है। डॉक्टर आमतौर पर यह सुनिश्चित करने के लिए अल्ट्रासाउंड करते हैं कि गर्भाशय ग्रीवा पूरी तरह से साफ़ है। यह आमतौर पर पहली तिमाही में होता है और इसका महिला की प्रजनन क्षमता पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं पड़ता है।
5. बार-बार होने वाला गर्भपात (Recurrent Miscarriage meaning in hindi)
जब किसी महिला को लगातार तीन या अधिक बार गर्भपात होता है, तो उसे पुनरावर्ती गर्भपात कहा जाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे आनुवंशिक समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन, संक्रमण या गर्भाशय की संरचना से संबंधित समस्याएं। इस स्थिति में, डॉक्टर कारण जानने के लिए रक्त परीक्षण, हार्मोन परीक्षण और सोनोग्राफी जैसे परीक्षण करते हैं। यह महिला के लिए भावनात्मक रूप से बहुत कष्टदायक हो सकता है और इसके लिए विशेष देखभाल और उपचार की आवश्यकता होती है। सही दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से स्वस्थ गर्भावस्था की संभावना बढ़ाना संभव है।
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गर्भपात के कारण क्या हैं? (Miscarriage reasons in hindi)

1. अनुवांशिक कारण (Genetic Reasons)
गर्भपात के सबसे आम कारणों में से एक भ्रूण में आनुवंशिक समस्या है। जब भ्रूण में गुणसूत्र दोष होता है, तो वह ठीक से विकसित नहीं हो पाता। आमतौर पर, यह गर्भावस्था के पहले सप्ताह में होता है और शरीर स्वाभाविक रूप से गर्भावस्था को समाप्त कर देता है। ऐसी आनुवंशिक समस्याओं का जोखिम उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे रोकना संभव नहीं है।
2. हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance)
गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए प्रोजेस्टेरोन और अन्य हार्मोन का उचित स्तर बहुत महत्वपूर्ण है। यदि प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम है, तो गर्भाशय भ्रूण को उचित पोषण नहीं दे पाता, जिससे गर्भपात हो सकता है। थायरॉइड हार्मोन का बहुत अधिक या बहुत कम होना भी गर्भावस्था को प्रभावित कर सकता है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) से पीड़ित महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। हालाँकि, इन समस्याओं को हार्मोन परीक्षण और संतुलित आहार के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।
3. संक्रमण (Infections)
गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय ग्रीवा विभिन्न रोगों से संक्रमित हो सकती है, जिनमें सिफलिस, रूबेला, साइटोमेगालोवायरस और मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई) शामिल हैं। ये रोग गर्भावस्था के विकास में समस्याएं पैदा कर सकते हैं और भ्रूण को उचित पोषण प्राप्त करने से रोक सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को संक्रमण के कारण बुखार, असामान्य योनि स्राव या अत्यधिक थकान का अनुभव हो सकता है। यदि संक्रमण का शीघ्र उपचार नहीं किया गया तो गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, गर्भावस्था के दौरान अच्छी स्वच्छता प्रथाओं का पालन करना और नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाना बहुत महत्वपूर्ण है।
4. शारीरिक समस्याएँ (Physical Problems)
फाइब्रॉएड या असामान्य गर्भाशय संरचनाएं भ्रूण के स्वस्थ विकास में समस्या पैदा कर सकती हैं। कुछ महिलाओं का गर्भाशय-ग्रीवा कमजोर होता है, जिससे भ्रूण को उचित रूप से धारण करना कठिन हो जाता है। इसके अलावा, पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में गर्भपात का खतरा अधिक होता है। डॉक्टर इन समस्याओं की पहचान के लिए अल्ट्रासाउंड और अन्य परीक्षणों की सलाह देते हैं। हालाँकि, ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए चिकित्सा सहायता उपलब्ध है।
5. जीवनशैली और बाहरी कारक (Lifestyle & External Factors)
शराब, तंबाकू और अधिक कैफीन भ्रूण के विकास को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यदि गर्भावस्था के दौरान खान-पान की आदतें ठीक न हों, अत्यधिक शारीरिक परिश्रम हो या मानसिक तनाव अधिक हो तो गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है। कम वजन या अधिक वजन (मोटापा) गर्भावस्था को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, यदि भ्रूण खतरनाक पदार्थों के संपर्क में आ जाए या दूषित वातावरण में हो तो भी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए, संतुलित जीवनशैली बनाए रखने और अस्वास्थ्यकर आदतों से बचने से गर्भपात की संभावना को कम करने में मदद मिल सकती है।
गर्भपात के लक्षण (Symptoms of miscarriage in hindi)

1. असामान्य रक्तस्राव (Abnormal Bleeding)
यदि गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हो तो यह गर्भपात का संकेत हो सकता है। हालाँकि, हल्का रक्तस्राव आमतौर पर सामान्य हो सकता है। यदि रक्त के साथ बड़े थक्के या ऊतक के टुकड़े बाहर आते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
2. पेट और पीठ में तेज दर्द (Severe Abdominal & Back Pain)
गर्भपात के दौरान, आपको पीठ या पेट के निचले हिस्से में हल्की से लेकर गंभीर ऐंठन का अनुभव हो सकता है। यह असुविधा आमतौर पर समय के साथ बढ़ती जाती है और प्रसव पीड़ा जैसी महसूस हो सकती है।
3. गर्भावस्था के लक्षणों का अचानक खत्म होना (Loss of Pregnancy Symptoms)
यदि गर्भावस्था के लक्षण, जैसे मतली, स्तन कोमलता और थकान, अचानक कम हो जाते हैं या गायब हो जाते हैं, तो यह गर्भपात का संकेत हो सकता है। हालाँकि, हर महिला का स्वास्थ्य अलग होता है, इसलिए चिकित्सकीय सलाह लेना बहुत ज़रूरी है।
4. पानी जैसा या गाढ़ा द्रव योनि से निकलना (Fluid or Tissue Discharge from Vagina)
गर्भपात के दौरान योनि से ऊतक के टुकड़े या गुलाबी, भूरे या लाल रंग का तरल पदार्थ निकल सकता है। यदि ऐसा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें ताकि आपको उचित देखभाल मिल सके।
5. अत्यधिक कमजोरी और चक्कर आना (Extreme Weakness & Dizziness)
यदि किसी महिला को अचानक बहुत कमजोरी, चक्कर आना या बेहोशी महसूस हो तो यह भारी रक्तस्राव का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में यथाशीघ्र चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
गर्भपात की रोकथाम कैसे करें? (How to prevent miscarriage in hindi?)

हालांकि सभी गर्भपात को रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ सावधानियाँ बरतकर इसकी संभावना कम की जा सकती है:
- संतुलित आहार लें |
- तनाव कम करें
- हानिकारक आदतों से बचें
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराएँ
- हल्का व्यायाम करें
गर्भपात के बाद क्या करें? (What to do after a miscarriage meaning in hindi?)
गर्भपात के बाद शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए:
1. मेडिकल जांच कराएँ (Get Medical Checkup)
गर्भपात के बाद यह सुनिश्चित करने के लिए अल्ट्रासाउंड और अन्य परीक्षण करवाना महत्वपूर्ण है कि गर्भाशय पूरी तरह से साफ है। यदि कोई ऊतक बच जाता है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा या सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
2. शारीरिक आराम करें (Take Physical Rest)
गर्भपात के बाद शरीर कमजोर हो सकता है, इसलिए कुछ दिनों तक अच्छी तरह आराम करना महत्वपूर्ण है। भारी वस्तुएं उठाने और अत्यधिक शारीरिक परिश्रम से बचें ताकि आपका शरीर जल्दी ठीक हो सके।
3. संतुलित आहार लें (Maintain a Healthy Diet)
गर्भपात के बाद शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आपको आयरन, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने चाहिए। हरी सब्जियां, फल और मेवे खाना और पर्याप्त पानी पीना बहुत फायदेमंद है।
4. मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें (Take Care of Mental Health)
गर्भपात का भावनात्मक प्रभाव बहुत गहरा हो सकता है, इसलिए भावनात्मक रूप से अपना ख्याल रखना बहुत महत्वपूर्ण है। अपनी भावनाओं को साझा करने के लिए परिवार, मित्रों या परामर्शदाता से बात करें।
5. अगली गर्भावस्था की योजना डॉक्टर की सलाह से बनाएं (Plan Next Pregnancy with Doctor’s Advice)
गर्भपात के कारणों को समझने के बाद अगली गर्भावस्था की योजना डॉक्टर से परामर्श करके बनानी चाहिए। अपने शरीर और मन के पूरी तरह से ठीक हो जाने के बाद ही दोबारा गर्भवती होने का निर्णय लें।
निष्कर्ष (Conclusion)
गर्भपात एक संवेदनशील विषय है, जो आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। ऐसा कई कारणों से हो सकता है, लेकिन कुछ सावधानियां बरतकर इसे रोका जा सकता है। यदि किसी महिला का गर्भपात हो जाता है तो उसके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
गर्भपात के लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ न करें और हमेशा डॉक्टर को दिखाएं। उचित देखभाल और स्वास्थ्य प्रबंधन से स्वस्थ गर्भावस्था संभव है।
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